AGRICULTUREभारत में किसानों के हालात पर आई ताज़ा रिपोर्ट

Statement Today अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस देश में किसानों की क्या स्थिति है उसको जानने के लिए राष्‍ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा वर्ष 2017-2018 में किए गए सर्वेक्षण से आपको अंदाज़ा हो जाएगा। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एनएसएसओ द्वारा वर्ष 2017-2018 में किए गए सर्वेक्षण से यह पता चला है कि वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2017-18 के बीच खेत में काम...
Statement Today
अब्दुल बासिद/ब्यूरो मुख्यालय: लखनऊ, भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस देश में किसानों की क्या स्थिति है उसको जानने के लिए राष्‍ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा वर्ष 2017-2018 में किए गए सर्वेक्षण से आपको अंदाज़ा हो जाएगा। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एनएसएसओ द्वारा वर्ष 2017-2018 में किए गए सर्वेक्षण से यह पता चला है कि वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2017-18 के बीच खेत में काम करने वाले अस्थायी मज़दूरों में 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। ख़ास बात यह है कि भारत की मोदी सरकार ने इस सर्वेक्षण को जारी करने से मना कर दिया है। रिपोर्टे के मुताबिक़, ग्रामीण भारत में 2011-12 और 2017-18 के बीच लगभग 3.2 करोड़ अस्थायी मज़दूरों (कैजुअल लेबर) से उनका रोज़गार छिन गया है, इनमें से क़रीब तीन करोड़ मज़दूर खेतों में काम करने वाले लोग थे।
भारत के अंग्रेज़ी भाषा के समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट में एनएसएसओ द्वारा वर्ष 2017-2018 में किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से बताया गया है कि 2011-12 से लेकर 2017-18 के बीच खेत में काम करने वाले अस्थायी मज़दूरों में 40 फ़ीसदी की गिरावट आई है। सबसे विशेष बात यह है कि मोदी सरकार ने इस सर्वेक्षण को जारी करने से मना कर दिया है। बता दें कि अस्थायी मज़दूर (कैजुअल लेबर) उन्हें कहते हैं जिन्हें ज़रूरत के मुताबिक़ समय-समय पर यानि कि अस्थायी रूप से काम पर रखा जाता है।
एनएसएसओ के आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 के बाद से ग्रामीण अस्थायी श्रम खंड (खेत और गैर-खेती) में पुरुष मज़दूरों के रोज़गार में 7.3 प्रतिशत और महिला मज़दूरों के रोजगार में 3.3 प्रतिशत की कमी आई है, इसके कारण कुल 3.2 करोड़ रोज़गार छिन गया है। इस नुकसान का एक बड़ा हिस्सा लगभग तीन करोड़ कृषि पर निर्भर है. वहीं गैर-कृषि क्षेत्र में मामूली गिरावट (13.5 प्रतिशत से 12.9 प्रतिशत तक) आई है.
उल्लेखनयी है कि दिसंबर 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) द्वारा स्वीकृति दिए जाने के बाद भी अभी तक मोदी सरकार ने एनएसएसओ की रिपोर्ट को जारी नहीं किया है, एनएससी के दो सदस्यों, जिसमें इसके कार्यवाहक अध्यक्ष पीएन मोहनन शामिल हैं, ने रिपोर्ट को जारी नहीं करने के विरोध में इसी वर्ष जनवरी के अंत में इस्तीफ़ा दे दिया था। इससे पहले यह रिपोर्ट आई थी कि भारत में 1993-1994 के बाद पहली बार पुरुष कामगारों की संख्या घटी है, एनएसएसओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में पुरुष कामगारों की संख्या घट रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आए हैं। इस रिपोर्ट में एनएसएसओ द्वारा साल 2017-2018 में किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के हवाले से बताया गया है कि भारत में पुरुष कामगारों की संख्या तेज़ी से घट रही है। वर्ष 2017-18 में पुरुष कामगारों की संख्या में 28.6 करोड़ थी, जो कि 2011-12, जब एनएसएसओ द्वारा पिछले सर्वे किया गया था, में 30.4 करोड़ थी, उससे पहले साल 1993-94 में यह संख्या 21.9 करोड़ थी। इन सभी आंकड़ों को देखकर लगता है कि पिछले पांच सालों की तुलना में 2017-18 में देश में रोज़गार के अवसर बहुत कम हुए हैं जो बहुत ही चिंता का विषय हैं। 

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